इस मिटà¥à¤Ÿà¥€ में बसी कथा
यह वह पावन सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ है जहाठà¤à¤—वान शिव ने महिषी वध के साकà¥à¤·à¥€ बने थे।
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यहाठकपूर जलाà¤à¤‚, नारियल फोड़ें और मन ही मन à¤à¤—वान को याद करते हà¥à¤ आगे बà¥à¥‡à¤‚।
यहाठरà¥à¤•कर शांत मन से पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ करें और फिर धैरà¥à¤¯ से आगे बढ़ें; यही इस पड़ाव की à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ है।